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Wednesday, 20 August 2008

महफिल की पहली वर्षगांठ और दो मधुर गीत

जिसे सुन आप निश्चय ही प्रसन्न हो जायेंगे... और हाँ महफिल पर आज तक बजाये गये सारे गीतों के लिंक एक साथ।

देखते देखते महफिल को एक साल पूरा हो गया, पुराने गीतों को एक जगह एकत्रित करने का मन हुआ। कुछ मेरे संकलन में से , कुछ चोरी चकारी कर एकत्रित किये गये गीतों को फिलहाल कुछ खास श्रोतावर्ग नहीं मिला। शायद भारतिय शास्त्रीय संगीत पर आधारित इतने मधुर गीतों का जमाना अब नहीं रहा, पर मैं अपनी ही धुन में इस पर गीत चढ़ाये जा रहा हूँ। पिछले एक साल में ५० पोस्ट भी मैं इस पर नहीं पर चढ़ा पाया। खैर ..
आज पहली वर्षगांठ पर मैं अपनी सबसे पसंदीदा गीतों में से दो गाने यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।
ये दोनों ही फिल्म आलाप के गीत हैं, आलाप फिल्म उन फिल्मों में से एक है जिनमें अमिताभ और सभी कलाकारों ने अपना सर्वश्रेष्‍ठ अभिनय किया। इस फिल्म में अमिताभ के अलावा दूसरी जो सबसे बड़ी खास बातें थी वह थी जयदेव जी का सीधे दिल में उतर जाने वाला संगीत, डॉ राही मासूम रज़ा और हरिवंशराय बच्चनजी का गीत और ऋषिकेश मुखर्जी का लाजवाब निर्देशन।
बहरहाल आज इस पहले जन्मदिन पर मुझे उचित यही लगा कि संगीत की देवी माँ सरस्वती, शारदा, विद्यादायिनी.. को नमन किया जाये लीजिये सुनिये यह मधुर प्रार्थना...इस धुन को जयदेवजी ने अलाउद्दीन खाँ साहब की धुन से प्रेरित होकर राग भैरवी में बनाया है, और इसे गाया है लताजी और दिलराज कौर ने।








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आलाप फिल्म के इस दूसरे गीत को जब भी मैं सुनता हूँ पता नहीं क्यों आँखें नम हो जाती है। इस सुंदर गीत को गाया है दक्षिण के महान गायक डॉ के जे येसुदास ने। येसुदास हिन्दी बिल्कुल नहीं जानते पर इस गीत में उनका हिन्दी का उच्चारण कितना बढ़िया है।
यह हिन्दी फिल्मों का दुर्भाग्य ही है कि येशुदास जैसे कलाकारों से हिन्दी में ज्यादा गाने नहीं गवा सके।
अगर मुझे हिन्दी फिल्मों के शीर्ष १०० गीतों की सूचि बनाने को कहा जाये तो निश्चय ही इस गीत का क्रमांक बहुत ऊपर होगा।








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इन दोनों गीतों को सुनने के बाद बताईये कि ये दोनों गीत आपको कैसे लगे?
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अब प्रस्तुत है पिछले साल में प्रकाशित सारी पोस्ट के लिंक एक ही जगह
एक दुर्लभ गाना पहाड़ी सान्याल/ कानन देवी की आवाज में
ज्युथिका रॉय का गाया एक गाना - चुपके चुपके बोल
सरस्वतीदेवी का दुर्लभ गाना
क्या आपने मुबारक बेगम का यह गाना सुना है ?
ये किसके इशारे जहाँ चल रहा है?
कुछ और ज़माना कहता है, कुछ और है जिद मेरे दिल की
एम कांई दिलीप कुमार बनातु नथी- युसुफ़ साहब की आवाज में एक गाना सुनिये
क्या आपने इरा नागरथ के गाने सुने हैं?
सपना बन साजन आये और बीता हुआ एक सावन... वाह जमाल सेन
गाना जो आप बार बार सुनना चाहेंगे
गायकी में शोहरत की बुलंदियों से किराना की दुकानदारी तक: जी एम दुर्रानी
पाकिस्तान के महान गायक सलीम रज़ा का एक मधुर गाना
चार महान गायकों के पहले गाने
मशहूर गायक जिन्हें अंतिम दिनों में भीख तक मांगनी पड़ी
प्रिय पापा अब तो आपके बिना....... (गुजराती गीत)
आ मुहब्बत की बस्ती बसायेंगे हम
श्याम म्हाने चाकर राखोजी- तीन स्वरों में मीरां का एक भजन
दुनिया ये दुनिया, तूफान मेल -- हिन्दी और बांग्ला में सुनिये
दीकरो मारो लाडकवायो: एक सुंदर गुजराती लोरी (गुज्रराती)
लताजी का यह गाना शायद आपने नहीं सुना होगा!
भूल सके ना हम तुम्हें: मन्ना डे द्वारा संगीतबद्ध गीत
दिले नाशाद को जीने की हसरत हो गई तुमसे... एक खूबसूरत मुजरा (गज़ल)
तेरी आँखों को जब देखा, कँवल कहने को जी चाहा - मेहदी हसन की एक उम्दा गज़ल-
ओ वर्षा के पहले बादल: जगमोहन
दो मधुर होली गीत ...
शबाब (१९५४) फ़िल्म के तीन मधुर गीत !!!
संगीतकार रोशन साहब का एक ही धुन का दो फिल्मों में सुंदर प्रयोग !!!
प्यारी तुम कितनी सुंदर हो: जगमोहन
ये ना थी हमारी किस्मत के विसाले यार होता : नूरजहाँ और सलीम रज़ा
रोने से और इश्क़ में बेबाक हो गये
ऋतु आये ऋतु जाये सखी री... चार रागों में ढ़ला एक शास्त्रीय गीत
देवता तुम हो मेरा सहारा: रफी साहब के साथ भी
दे उतनी सज़ा- जितनी है खता.. सलीम रज़ा
इस दिल से तेरी याद भुलाई नहीं जाती... रफी साहब
लाई किस्मत आँसुओं का जाम क्यूं..?
प्रीत में है जीवन: सहगल साहब का एक और यादगार गीत !!!
मिला दिल, मिल के टूटा जा रहा है
हमारी ख़ाक में मिलती तमन्ना देखते जाओ: राग हंसकिंकिनी पर आधारित एक गीत
अनिल दा की पुण्य तिथी पर उन्ही की आवाज में गाया हुआ एक गीत
ऐ मेरे हमसफर: अभिनेत्री नूतन का गाया एक दुर्लभ गीत
स्वतंत्रता दिवस पर किशोर कुमार का गाया हुआ एक बेशकीमती और दुर्लभ गीत !!
बादल देखी डरी हो स्याम.... ज्यूथिका रॉय
ना ना बरसो बादल , आज बरसे नैन से जल: लताजी
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Monday, 18 August 2008

ना ना बरसो बादल , आज बरसे नैन से जल: लताजी

पिछली पोस्ट में मीराबाई काली घटाओ को देखकर कह रही थी बादल देख डरी!! सम्राट पृथ्वीराह चौहान की नायिका का दुख: भी कुछ ऐसा ही है वह तो बादलों को बरसने से भी मना कर रही है।

बिरहिनी नायिका के नयनों से जल बारिश की तरह बरस रहा है, उसका मन मोर घायल है। आज उसे बारिश की बूंदें भी नहीं सुहा रही,, आईये सम्राट चन्द्र गुप्त फिल्म का राग मल्हार में बना, वसंत देसाई का संगीतबद्ध और लताजी का गाया हुआ यह मधुर गीत सुनते हैं, और हाँ यह गीत रचा है भरत व्यास ने।












ना ना ना बरसो बादल
आज बरसे नैन से जल
आज मन का मोर घायल
ना ना ना...

आज बरखा है दीवानी नयन जल खोये
बादलों के ही बहाने बिरहिणी रोये
बुंदनियों की छुम छन न न न-२
बाजे रे पायल , बाजे रे पायल
ना ना

श्याम बिन श्यामल घटा मन को नहीं भाए
पिया बिन बिजली हिया में अगन सुलगाए
नीले नयनो के गगन से-२
झरे रे काजल , झरे रे काजल..

ना ना ना बरसो बादल

Saturday, 9 August 2008

बादल देखी डरी हो स्याम.... ज्यूथिका रॉय

कल शाम ४ बजे से बारिश जम कर हो रही है, एक मिनीट के लिये भी सूरज के दर्शन नहीं हुए आज तो। दिन में भी काले बादलों की वजह से इतना अंधेरा हो गया है कि घर में तो कुछ भी नहीं दिखता, दिन में भी लाईट चालू करनी पड़ रही है।
ऐसे ही मौसम में काले बादल छाये हुए हैं और डरी हुई मीरां बाई अपने स्याम को याद कर रही है, देखिये ज्यूथिका रॉय कितने विकल स्वर में गा रही है, बादल देखी डरी हो स्याम, बादल देखी डरी!! मानो खुद मीरा बाई ही गाकर अपने स्याम को याद कर रही है। ज्यू्थिका रॉय को ऐसे ही थोड़े ही ना आधुनिक मीरा बाई कहा जाता था!
mirabai4
आप ध्यान से सुनेंगे तो आपको यूं अहसास होने लगेगा मानों बाहर वर्षा हो रही है और मीरा बाई गा रही है; और अगर काले बादल छाये हुए हैं, और तेज वर्षा हो रही है, तो इस गीत को सुनने का इससे बढ़िया कोई दूसरा अवसर हो ही नहीं सकता।


बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरी ।
श्याम मैं बादल देख डरी
काली-पीली घटा उमंडी बरसे एक धरी ।
जित जाऊं सब पाणी ही पाणी, हुई सब भोम हरी ॥
बादल देखी डरी..
जाके पिया परदेस बसत है भीजे बाहर खरी ।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर कीजो प्रीत खरी ।
श्याम मैं बादल देख डरी ।
रचना- मीरा बाई
संगीत - कमल दासगुप्‍ता

बादल देखी डरी

Tuesday, 5 August 2008

स्वतंत्रता दिवस पर किशोर कुमार का गाया हुआ एक बेशकीमती और दुर्लभ गीत !!

इस गीत को पचास के दशक में किशोर कुमार ने स्वतंत्रता दिवस पर गाया था । इसके बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन शायद इस गीत का ७८ RPM रेकार्ड भी निकला था जिसको बाद में बाजार से उठा लिया गया था । इस गीत में गीतकार से एक छोटी से गलती हो गयी थी, पन्द्रह अगस्त के लिये उसने "पुन्य तिथि" शब्द का प्रयोग किया है जबकि भारतीय सामाजिक परिपेक्ष्य में "पुन्य तिथि" मृत्यु के उपरान्त मनायी जाती है । अगर इस वजह से इस गीत का रेकार्ड वापिस बुलाया गया तो सोचने की बात है ।

आज "टूटा टूटा एक परिन्दा ऐसे टूटा कि जुड न पाया" जैसे गीत जो भाषायी संदर्भ में कुछ अटपटे से लगते हैं धडल्ले से चल रहे हैं । आईये भारत के स्वतंत्रता दिवस की याद में १० दिन पहले से ही खुशियां मनाये और इस मधुर गीत को सुने ।


पन्द्रह अगस्त की पुन्यतिथि फ़िर धूमधाम से आयी,
भारत के कोने कोने में खुशियाली है छायी ।

सन सैंतालिस में भारत को अंग्रेजो ने छोड दिया,
गोली बरसाकर हार गये तब जुल्मों से मुंह मोड लिया ।
बापू की अटल अहिंसा ने अपनी रंगत दिखलायी ।

पन्द्रह अगस्त की पुन्यतिथि फ़िर धूमधाम से आयी,

उस दिन सारे देश की शोभा अपने ढंग की न्यारी थी,
महलों से लेकर कुटियों तक दीपों की उजियारी थी ।
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारो ने फ़िर दीपावली मनायी ।

पन्द्रह अगस्त की पुन्यतिथि फ़िर धूमधाम से आयी,

देख हमारी कुर्बानी डोला लंदन का सिंहासन,
वीर जवाहर को सौंपा गोरों ने भारत का शासन,
दो सौ वर्षों के बाद फ़िर सत्ता फ़िर से आयी ।

पन्द्रह अगस्त की पुन्यतिथि फ़िर धूमधाम से आयी,



इस गीत के बारे में किसी को अन्य कोई जानकारी हो तो अपनी टिप्पणी से अवश्य सूचित करें ।

Wednesday, 25 June 2008

ऐ मेरे हमसफर: अभिनेत्री नूतन का गाया एक दुर्लभ गीत

महफिल ब्लॉग शुरु करते समय मेरी इच्छा थी कि इसपर दुर्लभ गीत ही सुनायें जायें। इस कड़ी में मैने कई दुर्लभ और मधुर गीत सुनाये भी। इस कड़ी में अभिनेता दिलीपकुमार का गाया हुआ गीत लागी नाही छूटे भी शामिल था।

कुछ सालों पहले मैने मेरी पसंदीदा अभिनेत्री नूतन की आवाज में एक गीत सुना था। (जी हाँ नूतन ने भी कुछ गीत गाये हुए हैं) उस गीत को मैने बाद में बहुत खोजा पर वह कहीं नहीं मिला। कल परसों नेट पर आखिरकार वह गीत मिल ही गया। अब यह गीत मुझे जहाँ से मिला वह आप जब जानेंगे तो आश्चर्यचकित रह जायेंगे। ( इस का खुलासा एक दो दिन में ॥दस्तक॥ पर होगा)

तो लीजिये प्रस्तुत है नूतन जी का गाया हुआ गीत, यह गीत नूतनजी की माँ शोभना समर्थ द्वारा निर्देशित फिल्म छबीली 1960 का है। इस गीत को संगीतबद्ध किया है स्नेहल भाटकर ने।

लीजिये सुनिये।

ऐ मेरे हम सफर
ले रोक अपनी नजर
ना देख इस कदर
ये दिल है बड़ा बेसबर

चांद तारों से पूछ ले
या किनारो से पूछ ले
दिल के मारो से पूछ ले
क्या हो रहा है असर

ले रोक अपनी नजर
ना देख इस कदर
ये दिल है बड़ा बेसबर

मुस्कुराती है चांदनी
छा जाती है खामोशी
गुनगुनाती है जिंदगी
ऐसे में हो कैसे गुजर

ले रोक अपनी नजर
ना देख इस कदर
ये दिल है बड़ा बेसबर

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