संभव है कि होम पेज खोलने पर इस ब्लॉग में किसी किसी पोस्ट में आपको प्लेयर नहीं दिखे, आप पोस्ट के शीर्षक पर क्लिक करें, अब आपको प्लेयर भी दिखने लगेगा, धन्यवाद।
होली के दिन सबने अपने अपने चिट्ठों पर बढ़िया होली गीत, कविता या व्यंग्य लिखे। मैने भी दो गीत चढ़ाने का निश्चय किया पर जब लाईफलोगर पर अपलोड करने की कोशिश की तो लाईफलोगर ने फाइल को अपलोड करने से मना कर दिया और अड़ गया।
बाद में ईस्निप पर अपलोड करने की कोशिश की तो उसने भी नहीं लिया, आज अचानक लाईफलोगर पर अपनी प्रविष्टियाँ देखते समय वे फाइल नजर आई जिन्हें अपलोड करने से पहले लाईफलोगर ने मना कर दिया था। अत: आज मैं आपको यह दोनों मधुर गीत सुनवा रहा हूँ।
पहला गाना है फिल्म जोगन (1950) का जिसके संगीतकार थे बुलो सी रानी और गीत लिखा था पण्डित इंद्र ने। फिल्म के मुख्य कलाकार थे दिलीप कुमार और नरगिस। गाया है गीता दत्त ने और गीत के बोल है डारो रे रंग डारो रसिया फागुन के दिन आये रे..
सागर जी, दोनो ही गीत बहुत बहुत सुंदर हैं। पहली बात तो आवाज़ गीता दत्त की जिसकी अपनी ताज़गी , है फिर गीतों में धुन की उर्जा का असर भी खू़ब है।
दोनों गाने अनमोल हैं भाई । पहले गाने का रिदम कमाल है । दूसरे गीत के दोनों रूप मन को लहराने पर मजबूर कर देते हैं ।
दोनों गीत अत्यंत सुन्दर हैं सागर भाई।
अच्छा. तो बताना भी पड़ेगा कि कैसे लगे गीत ?
ये हुई न बात. मस्त कर गया हर बार की तरह आप का ये पोस्ट भी. यूनुस भाई ने सही कहा : अनमोल हैं दोनों गीत.
वाह जी वाह...अनमोल खजाना!!!
vaah! bahut khuubsurat dono hi nagme.n..shukriyaa SAAGAR ji
बाट चलत नई चुनरी रंग डारी रे ,ओर सागर जी बहुत ही अच्छे लगे दोनो गीत
सागरजी,
दूसरा गीत तो अनमोल है ।
बहुत बहुत धन्यवाद !!!
शास्त्रीयता लिये ये दूसरा गीत "बाट चलत नई चुनरी रंग डारी रे " मनभावन लगा .हरेक उतार चढ़ाव के साथ दाद देने का मन हो रहा था.
Post a Comment
आपकी टिप्प्णीयां हमारा हौसला अफजाई करती है अत: आपसे अनुरोध करते हैं कि यहाँ टिप्प्णीयाँ लिखकर हमें प्रोत्साहित करें।