Friday, 21 March, 2008

ओ वर्षा के पहले बादल: जगमोहन

पिछले दिनों मीत ने अपनी पोस्ट में  महान गायक जगमोहन का गाया हुआ एक बहुत ही मधुर गीत  मेरी आँखे बनी दीवानी सुनवाया। आज मैं आपके लिये लेकर आया हूँ जगमोहनजी का गाया हुआ एक और गीत। यह गाना दुर्लभ तो नहीं है पर कईयों ने इसे नहीं सुना होगा।

यह गाना  फिल्म मेघदूत (1945)  का है या गैर फिल्मी इसकी पक्की जानकारी नहीं है। यह गीत फैयाज हाशमी ने लिखा था और इसका संगीत दिया है कमल दासगुप्ता ने।

महान कवि कालीदास रचित मेघदूत से यह गीत लिया  गया है। प्रस्तुत गीत में नायक अपनी नायिका के लिये संदेश भेज रहा है कि है बादल.. तुम जाओ और  मेरी प्रियतमा को मेरा संदेश सुनाओ। कवि नायक से यह कहलवाना नहीं चूके कि उसे किस पथ से हो कर जाना है कहां विश्राम लेना है  और कहां क्या क्या करना है। कालीदास रचित मेघदूत का  हिन्दी अनुवाद सबको पढ़ना चाहिये, लिंक नीचे दिया गया है। आईये गीत सुनें।

 

ओ वर्षा के पहले बादल, मेरा संदेसा ले जाना
ओ वर्षा के पहले बादल, मेरा संदेसा ले जाना
असुवन की बूंदन बरसाकर,-२
अल्का नगरी में तुम जाकर, खबर मेरी पहुँचाना
ओ वर्षा के पहले बादल.........

मालभूमी और अम्रकूट से विन्ध्याचल नर......
विदिशा नगरी और बेतवा तक होकर आगे पांव बढ़ाना
आग विरह की जहाँ भी पाना-२
बरस बरस कर उसे बुझाना
ओ वर्षा के पहले बादल.........

देख अंधेरा, देख अंधेरा पिया मिलन को
चलेगी छुप कर कोई गोरी,बस तुम बिजली चमकाकर
खोल न देना,खोल न देना, खोल न देना उसकी चोरी
विरहन को तुम जहाँ भी पाना, उसे कभी ना सताना
ओ वर्षा के पहले बादल.........

उज्जैनी में महाकाल का मंदिर जब तुम पाओ
पुजारिनों का नाच देखकर, पुजारिनों का नाच देख कर
अपना मन बहलाओ
पर तुम उनके अंग ढंग को देख अटक न जाओ-2
सिमला में न चम्बल में न कुरुक्षेत्र में रुकना
कनखल में न गंगा की लहरों को....झुकना
अटल हिमालय पे चढ़ के फिर यूँ मुड़ना कैलाश की ओर
ज्यूँ चंदा को देख प्यारे, गगन को झूमे जाये चकोर
अल्का में फिर ढूँढ उसे तुम, मेरा संदेसा सुनाना
ओ वर्षा के पहले बादल, मेरा संदेसा ले जाना

 

कालीदास के बादलों के माध्यम से संदेश  भेजने पर मैने पहले एक कार्टून बनाया था  देखिये

http://nahar.wordpress.com/2007/07/21/meghdoot/

 

Meghdoot

गीत सुनने के साथ इन्हें जरूर देखें:

कालीदास कृत मेघदूत और उसकी लोकप्रियता  और हिन्दी अनुवाद

होली की हार्दिक शुभकामनायें

 

 

 

 

7 comments:

अनूप शुक्ल said...

सही है।कालीदास आज होते तो उनका भी एक ब्लाग होता।

Dipak said...

mahaan kalakritiya, aise hi hote hai. aur geeto ka khajana adbhut hai. Holi ki shubhkamnaye!!!!!!!!

राज भाटिय़ा said...

सागर जी बहुत ही सुन्दर गीत,आपको भी होली की शुभकामनाएं !!ओर बहुत बहुत धन्यवाद गीत के लिये

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

आजकल तो बादल सिर्फ़ पंजाब में दिखाई दे रहे है.

परमजीत बाली said...

अच्छा गीत सुनवा्या॥ धन्यवाद।

मीत said...

वाह वाह .... सागर साहब. कह नहीं सकता जो महसूस कर रहा हूँ. आप शायद समझ रहे हों.

शोभा said...

सागर भाई
बहुत प्यारा गीत है। सुनकर आनन्द आ गया। इसी तरह गीतों मी मिठास बाँटते रहो। सस्नेह