Friday, 11 April, 2008

प्यारी तुम कितनी सुंदर हो: जगमोहन

मित्रों आज आपको एक बेहद मधुर और खूबसूरत गीत सुनवा रहा हूँ। जगमोहन की आवाज में मेरी आँखे बनी दीवानी और ओ वर्षा के पहले बादल सुन चुके हैं। जगमोहनजी की आवाज एकदम अलग पर इतनी खूबसूरत कि बस पूछे ना.. मीत के शब्दों में कहें तो

 इस आवाज़ का जादू भी कमाल है. कविता में जान डाल देती है. आवाज़ की रवानी का जवाब नहीं. ये गीत तो भी लाजवाब है ही, जगमोहन की आवाज़ में तो बस .... कुछ न पूछें.

सुंदर हो
कितनी सुंदर हो
प्यारी तुम कितनी सुंदर हो..२

मंदिर सा तेरा जीवन है
प्रतिमा जैसा तेरा मन है
धूप कपूर के सद चन्दन से-२
बना हुआ तेरा तन  है-२

कहे देवता तुम मनहर हो..
कहे देवता तुम मनहर हो..
प्यारी तुम कितनी सुंदर हो-२

रात समय की तुम हो लाली
और अमृत की तुम हो प्याली
तुम  ही दशहरा तुम्ही दीवाली
देवी हो इसीलिये अमर हो-२
प्यारी  तुम-२

तुम दुनियां में रूप की राशि
तुम गंगा हो तुम हो काशी
बिधनाने की भूल जरा सी
तुम्हे बनाया जग का वासी

कुछ भी हो तुम बड़ी मधुर हो
कुछ भी हो तुम बड़ी मधुर हो
प्यारी तुम कितनी...
सुंद हो ... कितनी सुंदर हो
प्यारी तुम

4 comments:

mamta said...

इस गीत को पहले कभी सुना हो याद नही पार आज सुनकर अच्छा लगा।

Neeraj Rohilla said...

वाह सागरजी,
बहुत सुन्दर गीत है । जगमोहन जी की आवाज में जादू है । उनके और भी गीतों को सुनवाईयेगा, इन्तजार रहेगा ।

उनका एक और गीत मुझे बेहद पसन्द है, "एक बार मुस्कुरा दो", आपने सुना ही होगा ।

Suresh Chiplunkar said...

लगे रहो सागर भाई म्यूजिक वाले… :) बढ़िया।

asad said...

Is sachche moti yaani shaandaar blog ko kahaan chhupaa rakhaa hai. Is kaa member kaise banaa jaa saktaa hai? Mere blog par bhi kabhi aaiye...haalaanki abhi kaam karne kee zaroorat hai.

http://hamkalaam.blogspot.com

ye roman lipi mein hai lekin aise gaanon ke baare mein hai jinke bolon ki prerna ya to kisi puraane gaane se lee gayi hai yaa phir puraane sher se.

Asad