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Wednesday, 28 September 2011

बाँध प्रीत फूल डोर- एक मधुर गीत

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दुनियाँ की सबसे सुरीली आवाज, लता मंगेशकर का आज तिरासीवां जन्म दिन है। लता जी पर इतने शब्द लिखे जा चुके कि और कुछ लिखना सही नहीं होगा। हमने श्रोता बिरादरी ब्लॉग पर लता उत्सव के रूप में पिछले १२ दिनों से कई सुन्दर गीत आपको सुनवाये, पर लता उत्सव मनाने के लिए १२ दिन बहुत कम हैं, अगर मैं अपनी पसन्द के लताजी के गाए गीत भी अगर रोज के एक के हिसाब से पोस्ट करूं तो उनका समापन करने में महीनों लग जायेंगे।

अब तक मैने महफिल ब्लॉग पर भी लता जी के कई दुर्लभ/ कम सुने जाने वाले गीत सुनाएं हैं। पर आज मैं एक ऐसा गीत सुनवाना चाह रहा हूं जो दुर्लभ और अनसुना नहीं है, लता जी अक्सर सुनाई देने वाले गीतों में से एक है।
आइये गीत सुनते हैं।


फिल्म: मालती माधव 1951
संगीत: सुधीर फड़के
गीत: पण्डित नरेन्द्र शर्मा


बाँध प्रीति फूल डोर, मन लेके चित्तचोर
दूर जाना ना, दूर जाना ना
मन के किवाड़ खोल, मीत मेरे अनमोल
भूल जाना ना, भूल जाना ना
कैसे सहूँ विछोहन, मन में रमा है मोहन
रूठ जाना ना, रूठ जाना ना

लता जी का फोटो पं नरेन्द्र शर्मा जी की सुपुत्री लावण्या शाह के सौजन्य से

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