मित्रों आज आपको एक बेहद मधुर और खूबसूरत गीत सुनवा रहा हूँ। जगमोहन की आवाज में मेरी आँखे बनी दीवानी और ओ वर्षा के पहले बादल सुन चुके हैं। जगमोहनजी की आवाज एकदम अलग पर इतनी खूबसूरत कि बस पूछे ना.. मीत के शब्दों में कहें तो
इस आवाज़ का जादू भी कमाल है. कविता में जान डाल देती है. आवाज़ की रवानी का जवाब नहीं. ये गीत तो भी लाजवाब है ही, जगमोहन की आवाज़ में तो बस .... कुछ न पूछें.
सुंदर हो
कितनी सुंदर हो
प्यारी तुम कितनी सुंदर हो..२
मंदिर सा तेरा जीवन है
प्रतिमा जैसा तेरा मन है
धूप कपूर के सद चन्दन से-२
बना हुआ तेरा तन है-२
कहे देवता तुम मनहर हो..
कहे देवता तुम मनहर हो..
प्यारी तुम कितनी सुंदर हो-२
रात समय की तुम हो लाली
और अमृत की तुम हो प्याली
तुम ही दशहरा तुम्ही दीवाली
देवी हो इसीलिये अमर हो-२
प्यारी तुम-२
तुम दुनियां में रूप की राशि
तुम गंगा हो तुम हो काशी
बिधनाने की भूल जरा सी
तुम्हे बनाया जग का वासी
कुछ भी हो तुम बड़ी मधुर हो
कुछ भी हो तुम बड़ी मधुर हो
प्यारी तुम कितनी...
सुंद हो ... कितनी सुंदर हो
प्यारी तुम
