मित्रों आज प्रस्तुत है आपके लिये मिरजा ग़ालिब की गज़ल ये ना थी हमारी किस्मत.. यह गज़ल आपने कई कलाकारों की आवाज में सुनी होगी। परन्तु मुझे सबसे ज्यादा बढ़िया लगती है स्व. तलत महमुद साहब के द्वारा गाई हुई भारत भूषण और सुरैया अभिनित फिल्म मिर्जा गालिब फिल्म की यही गज़ल.. ये ना थी। कुछ दिनों पहले मैने सलीम रज़ा और मल्लिका-ए-तरन्नुम (मैडम) नूरजहां के द्वारा गाई हुई 1961 में बनी पाकिस्तानी फिल्म गालिब की यह गज़ल सुनी। सुनने के बाद इस गज़ल का संगीत भी बहुत पसन्द आया तो आज आपके लिये यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस फिल्म की एक खास बात और है, और वह ये कि यह फिल्म नूरजहाँ की आखिरी फिल्म है।
बहुत दिनों से महफिल सजी नहीं थी तो आज मन हुआ कुछ अच्छा सा गाना नेट से ढूंढ कर लगाया जाये और कई घंटो की मेहनत के बाद एक ऐसा जबरदस्त गाना मिला, जिसे मैने लगातार कम से कम 20 बार सुना। गाने को सुनने पर लगता है कि इस गाने को तलत महमूद ने गाया है। यह गाना पाकिस्तान के गायक सलीम रज़ा ( Saleem Raza) ने फिल्म सीमा Seema (1963)के लिये गाया है। मुझे उम्मीद है आपको भी यह बहुत पसन्द आयेगा।
सलीम रज़ा के कुछ गानों का लिंक मैने नीचे दिया है उन्हें सुनने और देखने पर आपको यही महसूस होगा कि ये सारे गाने तलत महमूद ने ही गाये हैं।
भूल जाओगे तुम करके वादा सनम तुम्हे दिल दिया तो ये जाना भूल जाओगे तुम करके वादा ... तुम्हे... भूल...
दर्द का है समां गम की तन्हाई है जिस तरफ देखिये बेकसी छाई है-२ आज हर साँस पर होके बेताब दिल धड़कने लगा तो ये जाना भूल जाओगे तुम
कैसे गुजरेगी शाम कैसे होगी सहर अब ना वो मंजिले और ना वो हमसफर-२ देखते देखते रह गुजर ए गुजर अंधेरा हुआ तो ये जाना भूल जाओगे तुम
चांद को देखकर हो रहा हो है गुमां फूल के रुख पे छाई हो जैसे खजां मुस्कुराता हुआ मेरी
उम्मीद का चमन लुट गया तो
ये जाना भूल जाओगे तुम
करके वादा सनम
इस गाने को सुनने के बाद मैने गूगल पर सलीम रज़ा के बारे में जानकारी ढूंढी तो कुछ नहीं मिला, बहुत देर सर खपाने के बाद मुझे मेरी गलती पता चली मैं रज़ा की स्पैलिंग Raja लिख रहा था। बाद में Raza लिख कर सर्च किया तो बहुत सारा खजाना मिल गया। उस खजाने के कुछ अनमोल नग्में आपके लिये पेश किये हैं। भूल जाओगे तुम ..... के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली पर बहुत सारे वीडियो मिले। उनमें से एक वीडीयो यहाँ प्रस्तुत हैं। यह गज़ल फिल्म पायल की झंकार से है और इसका संगीत दिया है रशीद अत्तरे ने।
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इस गज़ल को हरिहरन ने अपने एल्बम सूकून में भी गाई है चलते चलते उसे भी सुन लीजिये यहाँ