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Sunday 12 July 2009

कैसे भाये सखी रुत सावन की: मल्हार राग, लताजी और सी रामचन्द्र जोड़ी की एक सुन्दर जुगलबन्दी

सावन की ऋतु, बरखा की बूंदे और मल्हार राग...अगर यह तीनों एक साथ मिल जायें तो किसको नहीं सुहायेगा! पर हमारी नायिका को भी सावन की रुत नहीं भा रही, अपनी सखी से शिकायत कर रही है कि कैसे भाये सखी रुत सावन की.......! क्यों कि उसके पिया उसके पास नहीं है, मिलना तो दूर की बात आने की पाती का भी पता ठिकाना नहीं,ऐसे में नायिका अपनी मन की बात अपनी सखी को ही गाकर सुना रही है।
आप सब जानते हैं अन्ना साहब यानि सी रामचन्द्र और लताजी ने एक से एक लाजवाब गीत हमें दिये। फिल्म पहली झलक का यह गीत सुनिये देखिये सितार और बांसुरी का कितना सुन्दर प्रयोग मल्हार राग में अन्ना साहब ने किया है।
और हां.... यह गीत फिल्म पहली झलक का है।


कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत सावन की
छम छम छम छम बरसत बदरा-२
रोये रोये नैनों से बह गया कजरा
आग लगे ऐसे सावन को-२
जान जलावे जो बिरहन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
धुन बंसी की सावनिया गाये
आऽऽऽ सावनिया गाये
धुन बंसी की सावनिया गाये-२
घायल मन, सुर डोलत जाये
बनके अगन अँखियन में भड़के-२
आस लगी पिया दरशन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत-२
आलाप आपके गुनगुनाने के लिये
म म रे सा, नि सा रे नि ध नि ध नि सा
म प द नि सा, रे सा रे नि सा ध निऽऽ प
म रे प ग म रे सा, प म रे प म नि द सा
म प द नि सा, नि नि प म ग म रि सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
सावन की
कैसे भाये सखी रुत आऽ सावन की

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Pahli Jhalak 1954 ...

5 टिप्पणियाँ/Coments:

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

सुन्दर !!

Abhishek Mishra said...

वाकई दुर्लभ गीत, धन्यवाद.

राज भाटिय़ा said...

मस्त कर दिया सागर साहब जी, बहुत सुंदर.
धन्यवाद

vimal verma said...

सागर भाई बहुत बढ़िया यही तो आपकी तारीफ़ है कि दुर्लभ गीतों का खजाना बारी बारी से आप सुनवाते रहते हैं और हम सुन कर रस में डूबे रहते हैं, बहुत बहुत शुक्रिया।

kase kahun?by kavita. said...

pahli baar suna ye geet kanon mein ras ghol gaya.dhanyavad.

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