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Saturday 23 July 2011

घर यहाँ बसाने आए थे, हम घर ही छोड चले

लताजी ने हजारों गीत गाए, लेकिन आज भी कई गीत हैं जो दुर्लभ से हैं। मैने अपनी पिछली पोस्ट्स में कई बार यथा संभव कोशिश की है कि लता जी के उन दुर्लभ गीतों को महफिल में पोस्ट करूं कि जिन लोगों ने इन्हें नहीं सुना है वे भी लताजी के उन सुमधुर गीतों को सुन कर आनंदित हो सकें। इस श्रेणी में महफिल में आज कई दिनों के बाद लता जी का एक और दुर्लभ गीत।
यह गीत फिल्म गजरे (Gajare 1948) का है। इस गीत को संगीतबद्ध किया है मेरे सबसे पसंदीदा संगीतकारों में से एक अनिल विश्वाjस (अनिलदा) ने। और गीत को लिखा है जी एस नेपाली यानि गोपाल सिंह नेपाली ने। गजरे फिल्म में मुख्य भूमिकाएं सुरैया और मोतीलाल ने निभाई हैं।

घर यहाँ बसाने आए थे
हम घर ही छोड़ चले
अपना था जिन्हें समझा हमने, वो भी दिल तोड़ चले

सोचा था सजन आएँगे आएँगे बहारे लाएँगे
हम एक चमन के दो पंछी बन जाएँगे -2
संध्या की बेला द्वार पे आ कर वो मुँह मोड़ चले
घर यहाँ बसाने आए थे….

जीवन में कभी इक प्यार का दीपक जलता था

मिलने के लिए दिल घुल-घुल के मचलता था -2
जब साथ पतंगा छोड़ दियाऽऽऽऽऽऽ तो दिया अकेले जले
घर यहाँ बसाने आए थे
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5 टिप्पणियाँ/Coments:

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही सुरीला गीत।

daanish said...

लता जी की आवाज़ में यह नायाब गीत सुन कर
बहुत अच्छा लगा.... लता जी की शुरूआती दिनों की
आवाज़ में एक अलग ही तरह की कशिश थी
जो सिर्फ महसूस की जा सकती है
कास्ट में आपने सुरैया का नाम दिया है ..
क्या यह गीत उन्हीं पर फिल्माया गया था !?!
और ... अनिल बिस्वास के अमर संगीत सुन कर
कौन ऐसा होगा भला,, जिसे सुकून ना मिलता हो
मुझे लगता है यह धुन उन्होंने बाद में प्रेम धवन के लिखे
एक गीत के लिए भी ( कुछ-कुछ ) इस्तेमाल की थी
आपको भी याद आ रहा होगा ...
"सीने में सुलगते हैं अरमाँ..."


'daanish'

गरिमा said...

Simply superb

Archana said...

बहुत मधुर ...आभार

ZEAL said...

इंसान के दिलों में प्यार जैसा कुछ है , ये तो सिर्फ इन मधुर गीतों को सुनकर ही महसूस होता है।

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