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Saturday, 1 September 2007

एम कांई दिलीप कुमार बनातु नथी- युसुफ़ साहब की आवाज में एक गाना सुनिये

कुछ वर्षों पहले मैं चित्रलेखा गुजराती समूह की पत्रिका "जी" का विशॆषांक पढ़ रहा था, जी साप्ताहिक गुजराती फिल्म पत्रिका है, और सबसे साफ सुथरी पत्रिका कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इसमें दिलीप कुमार पर एक लेख था एम कांई दिलीप कुमार बनातु नथी। इसका अर्थ है कि यों ही दिलीप कुमार नहीं बना जाता ( यानि दिलीप कुमार बनने कि लिये बहुत मेहनत करनी पड़ती है)
लेख में जिक्र था फिल्म कोहिनूर की शूटिंग के समय का जब निर्देशक एस यू. सनी साहब गाना मधुबन में राधिका नाची रे.. का फिल्मांकन कर रहे थे , इस गाने में दिलिप कुमार को सितार बजाते दिखाना था, सनी साहब ने निश्चय किया कि गाने में दिलीप कुमार के चेहरे का क्लोज अप ले लेंगे और सितार बजाते समय संगीतकार ( नाम याद नहीं आ रहा) को वही कपड़े पहन कर बिठा देंगे और उनकी शूटिंग कर लेगे। यह बात दिलिप कुमार को पता चली तो वे जिद पर अड़ गये कि इस गाने की शूटिंग एक महीने बाद कीजिये, पर क्यों यह यह दिलीप कुमार ने नहीं बताया।
सनी साहब ने दिलीप कुमार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
एक महीने बाद जब उस गाने को शूट करने का समय आया तो दिलिप कुमार सितार ले कर बैठे और खुद उन्होने सितार बजाया; और इतना जबरदस्त बजाया कि गाने की शूटिंग पूरी होने के बाद जब सितार नीचे रखा तब उनकी उंगलियाँ खून से लथपथ थी। यानि दिलिप कुमार ने मात्र एक महीने में सितार बजाना सीख लिया, जिसमें लोगों को बरसों लग जाते हैं।
धन्य है ऐसे महान अभिनेता को।
महफिल में आज मैं आपको फिल्म मुसाफिर का वह सुन्दर गाना सुनाने जा रहा हूँ ,जिसमें लता जी का साथ दिया है खुद दिलीप कुमार ने, इस सुन्दर गाने को सुनने के बाद आपको महसूस होगा कि दिलीप कुमार अगर गायन जारी रखते तो एक अच्छे गायक- अभिनेता बन सकते थे।
खूबसूरत सुचित्रा सेन और दिलीप कुमार के अभिनय वाली यह सुन्दर फिल्म निर्देशित की थी ऋषिकेष मुखर्जी ने, ( ऋषि दा की फिल्म हो तो गुणवत्ता का अंदाजा वैसे भी लग जाता है)
इस फिल्म की कहानी थी राजेन्द्र सिंह बेदी की और संवाद लिखे थे ऋत्विक घटक ने। और फिल्म का संगीत दिया है सलिल(दा) चौधरी ने।

दि. कु:. लागी नाहीं छूटेऽऽऽऽ राम चाहे जिया जाये
लता: आऽऽऽऽऽ चाहे जिया जाये

दिकु: ओ मन अपनी मस्ती का जोगी
कौन इसे समझाये
लता: आऽऽऽ कौन इसे समझाये
दिकु: चाहे जिया जाये
लता: लागी नाहीं छूटे रामा चाहे जिया जाये

दिकु:रिमझिम रिंमझिम दुनियां बरसी -छिड़ी प्यार की बातें
लता: मीठी मीठी आग में सुलगी कितनी ही बरसातें
दोनों: रिमझिम रिमझिम ........

लता: जानबूझ कर दिल दीवाना बैठा रोग लगाये- चाहे जिया जाये
दिकु लागी नाहीं छूटे
लता: चाहे जिया जाये

लता: लागी नाहीं छूटे रामाऽऽऽ चाहे जिया जाये
मन अपनी मस्ती का जोगी- २
कौन इसे समझाये- चाहे जिया जाये

दिकु : तारों में मुस्कान है तेरी तेरी चांद तेरी परछाई
उतने गीते हैं जितनी रातें हमने साथ बिताई
लता: कैसे भूलूं रे सांवरियाऽऽऽ करूं मैं कौन उपाय

दोनों: चाहे जिया जाये

लता: रिमझिम रिंमझिम दुनियां बरसी -छिड़ी प्यार की बातें
मीठी मीठी आग में सुलगी कितनी ही बरसातें
रिमझिम रिमझिम ........
जाबूझ कर दिल दीवाना बैठा रोग लगाये- चाहे जिया जाये
दिकु: लागी नाहीं छूटे
लता: चाहे जिया जाये

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