रफी साहब का गाया हुआ यह गैर फिल्मी गीत आज तक नहीं सुना था। आज सुबह मेल खोलते ही सबसे पहले रफीमूर्ति साहब की मेल मिली और उसमें था रफी साहब का गाया हुआ अनमोल गैर फिल्मी गीत.. इस दिल से तेरी याद भुलाई नहीं जाती- ये प्यार की दौलत है लुटाई नहीं जाती।
अन्तर्जाल पर इस गीत के बारे में बहुत खोजने पर भी कोई जानकारी नहीं मिली, कि किस संगीतकार ने इस गीत की संगीत रचना की है और कौन गीतकार हैं। आप के पास अगर कोई जानकारी हो तो जरूर बतायें।
तब तक आप सुनिये यह मधुर गीत..
और धन्यवाद मूर्ति साहब, एक और अनमोल नग्मा भेजने के लिये।
कुछ महीनों पहले मैने महफिल में आपसे एक प्रश्न पूछा था कि क्या आपने मुबारक बेगम का यह गाना सुना है ? साथ ही मुबारक बेगम का गाना देवता तुम हो मेरा सहारा सुनवाया था। उस समय मेरे पास सिर्फ मुबारक बेगम का गाया हुआ हिस्सा ही था।
हैदराबाद में मेरे एक मित्र हैं रफीमूर्ति साहब! आपका नाम तो है ए. मूर्ति और बैंक ऑफ इण्डिया में ऑफिसर हैं पर रफी साहब के परम भक्त हैं। मूर्ति साहब रफी फाउंडेशन से जुड़े हैं और रफी साहब पर ब्लॉग भी लिखते हैं,। मूर्ति साहब ने मुझे एक मेल फॉरवर्ड की जिसमें देवता तुम हो मेरा सहारा वाला पुरा गीत था।
तो आप सबके लिये प्रस्तुत है मुबारक बेगम के साथ स्व. मोहम्मद रफी साहब का गाया दायरा (1953) फिल्म का यह यह गीत।
शकील बदायूँनी और नौशाद साहब ने १९५२ में बैजू बावरा फ़िल्म को अपने संगीत से अमर बना दिया था । १९५४ में इसी जोडी ने शबाब फ़िल्म में बेह्द मधुर संगीत दिया । मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर, शमशाद बेगम, हेमन्त कुमार और मन्ना डे की आवाजों से नौशाद साहब ने शकील बदायूँनी के शब्दों के इर्द गिर्द एक संगीत का तिलिस्म सा बना दिया था । नौशाद साहब और शकील बदायूँनी की इसी जोडी ने मुगल-ए-आजम में भी संगीत का परचम लहराया था । इस कडी में आप सुनेंगे शबाब फ़िल्म के तीन सच्चे मोती ।
पहला गीत "आये न बालम वादा करके" मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज में है ।
आये न बालम वादा करके, -२ थक गये नैना धीरज धर के, धीरज धर के आये न बालम वादा करके-२
छुप गया चंदा लुट गयी ज्योति, तारे बन गये झूठे मोती, पड गये फ़ीके रंग नजर के, आये न बालम वादा करके-२
आओ के तुम बिन आँखो में दम है, रात है लम्बी जीवन कम है, देख लूँ तुमको मैं जी भरके, आये न बालम वादा करके-२
दूसरा गीत मन्नाडे जी की आवाज में एक भजन है, "भगत के बस में है भगवान"
भगत के बस में है भगवान मांगो मिलेगा सब को दान
भेद अनोखे तोरे दाता, न्यारे तोरे धन्धे कन्हैया, न्यारे तोरे धन्धे मूरख बुद्धिमान बने है, आंखो वाले अंधे दे तू इनको ज्ञान..
भगत के बस में है भगवान मांगो मिलेगा सब को दान
मोहे पुकारे सब सन्सारी, और मैं तोहे पुकारूँ, कन्हैया आज लगी है लाज की बाजी जीता दाँव न हारू भगती का रख मान,
भगत के बस में है भगवान मांगो मिलेगा सब को दान
तू ही मारे तू ही जिलाये गोवर्धन गिरधारी आज दिखा दे संगीत की शक्ति रख ले लाज हमारी निर्जीव को दे जान
जय जय सीताराम, निर्जीव को दे जान जय जय राधेश्याम जय जय सीताराम, जय जय राधेश्याम...
तीसरा गीत लताजी की आवाज में है, "मर गये हम जीते जी, मालिक तेरे संसार में"
मर गये हम जीते जी, मालिक तेरे संसार में, चल दिया हम को खिवईया छोडकर मझधार में, मालिक तेरे संसार में, मर गये हम...
उनका आना उनका जाना खेल था तकदीर का, ख्वाब थे वो जिन्दगी के दिन जो गुजरे प्यार में, मालिक तेरे संसार में, मर गये हम...
ले गये वो साथ अपने साज भी आवाज भी, रह गया नग्मा अधूरा दिल के टूटे तार में, मालिक तेरे संसार में, मर गये हम...
पिछले दिनों मेरे अनुरोध पर यूनुस भाई ने अपने लेख में हमें बताया कि किस तरह मशहूर संगीतकार रामलाल ने मुफलिसी में अपने अंतिम दिन गुजारे। मैने नेट पर इस तरह के अन्य गायकों के बारे में जानकारी पाने की कोशिश की तो नलिन शाह के एक लेख से कई ऐसे गायक संगीतकारों के बारे में पता चला जिन्होने अपने अंतिम दिन भीख मांगते हुए गुजारे।
मशहूर अभिनेता मास्टर निसार जिन्होने फिल्म शीरी फरहाद 1931 से लोगों को अपनी मधुर आवाज से लोगों को दीवाना बनाया, अपने जीवन के अंतिम दिन ब्रेड के एक-एक टुकड़े के लिये भीख मांगते हुए गुजारे। आपने राजकुमारी का नाम तो सुना ही होगा जिन्होने महल फिल्म में घबरा जो हम सर को टकरा दें तो अच्छा हो और बावरे नैन के सुन बैरी सच बोल जैसे सुन्दर गीत गाये थे, और फिल्म जगत में अपनी आवाज से छा गई थी, अंतिम दिनों में बहुत गरीबी में लगभग भिखारी की तरह गुजारे। मास्टर परशुराम ने फिल्म दुनिया ना माने 1937 में भिखारी का रोल निभाया और मन साफ तेरा है या नहीं पूछ ले दिल से गाना गाया, बाद में अपनी असली जिंदगी में भिखारी बने।
रतन बाई जो फिल्म भारत की बेटी फिल्म में तेरे पूजन को भगवान बना मन मंदिर आलीशान जैसा गाना गाकर प्रसिद्ध हुई अपने आखिरी दिनों में हाजी अली की दरगाह के बाहर भीख मांगती पाई गई। मशहूर संगीतकार खेमचन्द्र प्रकाश जी की दूसरी पत्नी भी मशहूर संगीतकार नौशाद को भीख मांगती मिली। कहीं पढ़ा था कि हमराज फिल्म की सुन्दर नायिका विम्मी के अंतिम दिन भी बहुत बुरे गुजरे। भारत भूषण और भगवान दादा जैसे सुपर स्टारों का हाल भी बहुत बुरा हुआ।
मैं इस लेख में खास जिनका जिक्र करना चाह रहा हूँ वे थे मशहूर संगीतकार एच खान मस्ताना (H. Khan Mastana) जिन्होने मोहम्मद रफी साहब के साथ फिल्म शहीद में वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो जैसे कई शानदार गीत गाये और मुकाबला 1942 जैसी कई फिल्मों में संगीत भी दिया; एक दिन मोहम्मद रफी साहब को हाजी अली की दरगाह के बाहर भीख मांगते मिले। मैं आज आपको उनके गाये दो गाने सुनवा रहा हूँ जिनमें एक तो यही है वतन की राह... इस गीत के संगीतकार गुलाम मोहम्मद हैं।
वतन की राह में
दूसरा गाना फिल्म मुकाबला 1942 का है गीत के बोल हैं हम अपने दर्द का किस्सा सुनायें जाते हैं। गीतकार एम करीम और संगीतकार खुद खान मस्ताना हैं।